Tuesday, 7 June 2016

मेरी माँ से ऊपर एक माँ - कविता

मेरी माँ से ऊपर एक माँ - कविता


ओ माँ मेरी माँ -  ओ माँ मेरी माँ।

कही विराजे ज्वाला जी माँ, कही विराजे काली। 
हाथों में हथियार लिए माँ दुष्टों से है बचाती॥

ओ माँ मेरी माँ -  ओ माँ मेरी माँ।

कही खड़ी माँ चण्डी बनकर, कही बानी चामुण्डा।
कण - कण में है वास करे तू, भक्तों को है संभाला॥

ओ माँ मेरी माँ -  ओ माँ मेरी माँ।

कही सजी माँ नैना बनकर, कही सजी माँ वैष्णो।
भक्तों की तू झोली भरती, देती है तू दुआएँ॥

ओ माँ मेरी माँ -  ओ माँ मेरी माँ।

कही खड़ी माँ दुर्गा बनकर, कही बनी माँ लक्ष्मी।
भक्त पुकारे आर्त भाव से - हे माँ मुझे बचाओ॥

ओ माँ मेरी माँ -  ओ माँ मेरी माँ।

- मेनका

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